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नागदा-भगवान महावीर का जन्मवाचन एवं स्वामिवात्सलय का आयोजन हुआ,जैन दादावाडी में मनाया गया जन्म उत्सव

1-भगवान महावीर का जन्मवाचन एवं स्वामिवात्सलय का आयोजन हुआ

|MPnews24|जवाहर मार्ग स्थित श्री शांतिनाथ जीनालय श्री राजेन्द्र सुरी जैन ज्ञानमंदिर जैन कॉलोनी में भगवान महावीर का जन्मवाचन महोत्सव धुमधाम से मनाया गया। यहाँ चातुर्मास हेतु विराजित सोम्यवंदना श्रीजी मसा आदि ठाणा ३ की निश्रा में समस्त कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।  पूज्य आचार्य श्री जयन्तसेन सूरिश्वरजी के आर्शीवाद से एवं बाबुलाल बोहरा की प्रेरणा से प्रभु श्री सुमतिनाथजी एवं श्री श्रेयांसनाथजी की आंगी बनाकर चढाने का लाभ स्व. खूबचन्द केसरबाई, हुक्मीचन्द रतनबाई, स्व. निर्मलादेवी, स्व. चिमनलाल बोहरा की मधुर स्मृति में करूणेश विजया, शिरिष बोहरा आदि ने लिया।  श्रीसंघ के मिडिया प्रभारी ब्रजेश बोहरा ने बताया कि भगवान का मुनिमजी बनने का लाभ मांगीलाल विजयकुमार कुंवर परिवार ने लिया। इसी प्रकार अष्टप्रकारी वार्षिक चढावा बोले गये, जिसमे सर्वाधिक बोली ४७ हजार ६०७ रूपये केशर पुजन की सोहनदेवी जवाहरलालजी तांतेड द्वारा ली गई। १४ स्वप्न, आरती एवं पालनाजी की बोली का लाभ कांतिलाल सौभागमल गेलडा ने लिया। श्रीसंघ की और से नारियल वदारने की बोली भी प्रथमबार बोल गई। आंगी का करने वाले सभी भक्तों, महावीर मण्डल, संगीत मण्डल एवं पुजारी का राजेन्द्रसुरी जैन ज्ञान मंदिर ट्रस्ट द्वारा बहुमान किया गया। स्वामिवात्सल्य के लाभार्थी बोहरा एवं भारतीय परिवार का बहुमान भी श्रीसंघ द्वारा किया गया। रात्रि में ९ बजे से महावीर संगीत मण्डल द्वारा भव्य भक्ति संगीत का आयोजन जिनालय में रखा गया। इस अवसर पर भगवान गौतम स्वामी की आंगी बनाने का लाभ विजय कुमार केसरीमल मेहता ने लिया।

2-जैन दादावाडी में मनाया गया जन्म उत्सव

|Mpnews24| बुधवार को जैन दादावाडी मेहतवास बिरलाग्राम में भगवान महावीर का जन्म उत्सव मनाया गया, अंग रचना सुलोचना बाफना ने की, माणक सुराणा, अनिल सुराणा, अजय जैन, सुधांशु जैन, जम्बू सुराणा, विमल मुकीम, शैलेन्द्र देशलहरा, आभा जैन, विनीता सुराणा, विजय धारीवाल एवं सकल जैन श्री संघ के सभी सदस्य इस अवसर पर उपस्थित थे। माँ त्रिशला को आये सपना जी की बोली भी लगाई गई। अंत मे वासु पूज्य,महावीर स्वामी, जिनदत्त सूरीजी, नाकोड़ा भैरव देवीजी की महा आरती श्री संघ द्वारा की गई, आज के भगवान महावीर के जन्म उत्सव पर अंगरचना, सुलोचना बाफना द्वारा की गई