नागदा-दो बड़े विद्यालयों की साख पर लगा प्रश्नचिन्ह ?

नागदा-दो बड़े विद्यालयों की साख पर लगा प्रश्नचिन्ह ?

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Nagda|Mpnews24|आदित्य बिरला ग्रुप ग्रेसिम उद्योग द्वारा बिरलाग्राम में संचालित नगर के तीन प्रमुख स्कूलों में से दो निरंतर विवादों में घीरे रहने के कारण अपनी साख खोते जा रहे हैं। ५० वर्ष पुराने स्कूल आदित्य बिरला हायर सेकेण्डरी स्कूल (ग्रेसिम विद्यालय) तथा आदित्य बिरला पब्लिक स्कूल (ग्रेसिम विद्या मंदिर) इन दिनों महिला प्राचार्यो की तानाशाही तथा स्कूल में होने वाले विवादों चाहे वह शिक्षकों से जुडा हो अथवा विद्यार्थीयों से सुर्खीयाँ बटोर रहे हैं। स्कूलों में चल रहे विवादों की विपरित प्रतिक्रियाऐं भी सुनने को मिल रही हैं बावजुद इसके उद्योग प्रबंधन जो कि स्कूलों की संचालन समिति का प्रमुख भी है वह हालात पर काबू करने में नाकाम साबित हुआ है।

ग्रेसिम विद्यालय की क्यों बिगड रही व्यवस्थाऐं ?

वर्षो पूर्व बच्चों के भविष्य को संवारते हुए उन्हें उचित मुकाम पर पहुँचाने का उद्देश्य लेकर उद्योग द्वारा यहाँ ग्रेसिम विद्यालय अब आदित्य बिरला हायर सेकेण्डरी स्कूल की स्थापना की गई थी। इस स्कूल से पढ कर निकले विद्यार्थी देश ही नहीं अपितु विदेशों में अपनी कामयाबी का झंडा गाड कर नागदा नगर का नाम गौरवान्वित कर रहे हैं। प्राचार्यो की बात की जावे तो टीपी सिंह, चन्द्रकांत जैन, दीपक कुमार शर्मा आदि के नेतृत्व में विद्यार्थीयों की तरक्की के साथ जो अनुशासन की गाथाऐं यहाँ लिखी गई है वह अब इतिहास के पन्नों में दर्ज होकर रह गयी है। वर्तमान में स्कूल में प्राचार्य पद का जिम्मा अजंताहंस अरोडा संभाल रही हैं। श्रीमती अरोडा की नियुक्ति को लेकर अनेक तरह के सवाल यहाँ समय-समय पर उठते रहे हैं। उन्हीं के नेतृत्व में स्कूल में पढाने वाले शिक्षकों के बीच उपजे विवाद चार दिवारी से बाहर निकल कर सडकों पर भी आये। विद्यार्थीयों की समस्याओं को लेकर राजनीतिक दलों से जुडे विद्यार्थी संगठनों ने आंदोलन तक स्कूल परिसर में किये हैं। विद्यार्थीयों को प्रताडित किये जाने संबंधी मामले भी समाचार पत्रों में छपते रहे हैं। खास बात यह है कि जो स्थिति इस स्कूल को लेकर इन दिनों निर्मित हुई है उसका नामोनिशा पूर्व के इतिहास में कहीं भी दर्ज नहीं है। प्राचार्य की विवादास्पद कार्यप्रणाली की शिकायतें भी उद्योग प्रबंधन तक समय-समय पर पहुँची है लेकिन मामले में किसी तरह की कार्रवाई न होना अथवा कदम न उठाया जाना इस बात को दर्शा रहा है कि अब यह स्कूल भगवान भरासे चल रहा है। शायद उद्योग स्कूल के कामकाज में दखल देने में रूची नहीं रख रहा है।

विद्या का मंदिर कहलाने वाला ग्रेसिम विद्या मंदिर प्राचार्य की बदमिजाजी से बदनाम

उद्योग द्वारा संचालित दुसरे स्कूल ग्रेसिम विद्या मंदिर अब आदित्य बिरला पब्लिक स्कूल वर्तमान में यहाँ पदस्थ प्राचार्य डेफनी अंगर के बेतुको फरमानों तथा शिक्षकों व विद्यार्थीयों पर थोपे गये अपने निर्णयों के कारण विवादों में घिरा हुआ है। पूर्व में यहाँ पदस्थ प्राचार्यो की बात की जावे तो एमपी तिवारी, डॉ. जयश्री भार्गव जैसे प्राचार्यो ने स्कूल की साख को अपने बेहतर प्रबंधन के चलते जिन उंचाईयों पर पहुँचाया था वह वर्तमान में पदस्थ प्राचार्य अंगर की बदमिजाजी तथा हिटलरशाही रवैये के कारण सीधे अर्श से फर्श पर आ गई है। यहाँ भी प्राचार्य के दुव्र्यवहार के कारण शिक्षक तनाव में काम करने को मजबूर हैं, तो दूसरी तरफ विद्यार्थी तथा उनके अभिभावक आये दिन जारी होने वाले फरमानों से परेशान होते रहते हैं। विद्यालय में कुप्रबंधों, अव्यवस्थाओं को लेकर कुछ माह पूर्व ही युवक कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने स्कूल के गेट पर आंदोलन खडा कर दिया था। प्रशासन एवं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर पहुँच कर स्थिति संभालना पडी। बावजुद इसके यहाँ विवादित स्थिति सामान्य होने का नाम नहीं ले रही है। एक वर्ग विशेष से आने वाली प्राचार्य यहाँ धर्म से जुडे कायदों को लागू करने संबंधी मामले में भी विवादित रह चुकी हैं। हिन्दू संगठन प्राचार्य की कार्यप्रणाली को लेकर पूर्व में अपना तीखा विरोध दर्ज करा चुके हैं। दोनों ही स्कूलों में प्राचार्यो के इर्द-गिर्द बने रहने वाले शिक्षकों की भूमिका भी विवादों को बढाने में अहम रही है। एबीपीएस में पूर्व में पदस्थ रही महिला प्राचार्य डॉ. भार्गव के खिलाफ षडयंत्र रच कर उन्हें परेशान करते हुए यहाँ से रवानगी दिलवाने मेंं अपनी भूमिका निभाने वाला एक शिक्षक इन दिनों भी उन्हीं कार्यो में लिप्त होकर विद्यालय का माहोल बिगाडने का कार्य कर रहा है। स्कूलों का नाम खराब होने तथा इसके बुरे परिणाम शिक्षण व्यवस्था पढने से जुडी शिकायतें उद्योग प्रबंधन के साथ-साथ स्कूल संचालन समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों तक भी पहुँची है। शीघ्र शिकायतों पर गौर कर इसे उचित कार्रवाई के अंजाम तक पहुँचाने का प्रबंधन द्वारा नहीं किया जाता है तो जो नाम इन शिक्षण संस्थाओं में पूर्व में पदस्थ रहे प्राचार्यो के मार्गदर्शन में कमाया है लोग उसे भूलाने में देरी नहीं करेंगे।

एक विद्यालय ने बचाया ग्रुप का गौरव

उद्योग द्वारा नगर में विद्यार्थीयों को उचित शिक्षा की आवश्यकता को देखते हुए आदित्य बिरला सिनियर सेकेण्डरी स्कूल के नाम से तीसरे स्कूल की स्थापना ३० वर्ष पूर्व बिरलाग्राम पेट्रोल पंप के समीप की गई थी। इस स्कूल में बच्चों के भविष्य को गढने का कार्य योजनाबद्ध तरीके से श्रेष्ठ प्राचार्य व शिक्षकों के मार्गदर्शन में शुरू किया गया था। कुछ एक मामलों को छोड दे ंतो यहाँ की व्यवस्थाऐं उपरोक्त दोनों स्कूलों की व्यवस्थाओं से आज बेहतर कही जा सकती है। विपरित परिस्थतियों में उद्योग समूह की साख को बचाये रखने का कार्य यह स्कूल कर रहा है। वर्तमान में यहाँ प्राचार्य के रूप में योगेश पालीवाल पदस्थ हैं। विवादों से अमुमन दूर रहने वाले श्री पालीवाल ने अपना ध्यान सिर्फ बच्चों की बेहतर शिक्षा और उनके भविष्य पर केन्द्रीत कर रखा है। पूर्व में यहाँ एबीपीएस से आये श्री तिवारी के अलावा अनुराग दास आदि भी प्राचार्य पद पर रह चुके हैं। उनके कार्यकाल में भी विवादों से दूर रहकर शिक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाये रखने के जो प्रयास किये गये थे वह सतत जारी हैं। इसी का परिणाम है कि उद्योग समुह द्वारा संचालित स्कूलों में बच्चों के प्रवेश की बात जब आती है तो तब अभिभावकों की पहली पसंद यही स्कूल होता है।