नागदा- खुले मे शौच करने वाले को खुद रोकते है , पर...

नागदा- खुले मे शौच करने वाले को खुद रोकते है , पर न्यायालय परिसर मे क्यो नही देखते , असुविधाओ का भंडा-फोड़ करती ये रिपोर्ट

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Nagda | Mpnews 24 | यह खबर उन जवाबदारों के लिये शर्मशार करने वाली है जो इन दिनों शहर से लेकर गांव तक का भ्रमण कर पांव के निशान के जरिए उन लोगों के निकट पहुंचने का काम कर रहे है जो खुले में शौच करते है तथा उन्हें इस बात का उपदेश भी दिया जा रहा है कि खुले में शौच करने से गंदगी फैलती है वह बिमारी का कारण बनती है। पांव के निशान देखने वाले जिम्मेदार न्यायालय परिसर में टुटे हुए शौचालय को अनदेखा कर रहे है। जब इसके एक ज्वलंत पहलू को देखते है तो पाते है कि खुले में शौच करने वालों को रोकने वाले स्थानीय शासन के प्रशासनिक अधिकारी कितने फिक्रबंद है और वह अपने कत्र्तव्यों का कितना पालन कर रहे है।

न्यायालय परिक्षेत्र के पास एक भी सुविधा-घर नही

प्रतिदिन सैकड़ो की संख्या में महिला एवं पुरूषो का न्याय पाने के लिये आना जाना लगा रहता है उस न्यायालय परिक्षेत्र के आसपास न तो कोई महिलाओं के लिये सुविधाघर की व्यवस्था है और न ही कोई शौचालय ऐसे में न्याय के लिये आने वाले महिला पुरूषों को या तो न्यायालय प्रागंण की आड़ में या तो रेल की पटरी के निकट खुले में मल मूत्र त्याना पड़ता है जो महिलाओं के लिये तो शर्मिदगी से भरा पल नहीं होता है लेकिन उन लोगों की आंखे अभी भी नहीं खुल रही है जो खुले में शौच नहीं करने के संदेश को लेकर झाकी बाजी कर रहे हे?

न्यायाधिश ने भी कराया अवगत

न्याय की गुहार लगाने के लिये आने वाले महिला एवं पुरूषों के लिये न्यायलय परिक्षेत्र के निकट कहीं भी सुविधाघर एवं शोचालय नहीं होने के मुद्दे को लेकर गत दिनों नागदा न्यायालय के एक न्यायाधिश ने नगर पालिका के उन जवाबदार अधिकारियों को अवगत कराते हुए कहा कि क्या इस तरह का घटनाक्रम अच्छा लगता है जबकि पूर्व में भी सुविधाघर एवं शोचालय बनाने को कहा गया था। बावजूद कोई पहल नहीं की। न्यायाधिश के इस बात को सुनने के बाद भी शायद उन लोगों ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाए है देखना है इस मुद्दे को लेकर क्या पहल नपा के जवाबदार करते है। अगर ऐसा नहीं होता है तो यह तो साबित हो जाएगा कि थोता चना बजता है घना ?