नागदा-भाजपा नेता अब्दुल हमीद ने चम्बल के पानी को लेकर प्रशासन एवं...

नागदा-भाजपा नेता अब्दुल हमीद ने चम्बल के पानी को लेकर प्रशासन एवं मेनेजमेन्ट पर फैकी गुगली

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Nagda |MpNews24| चंबल नदी में जल की मात्रा व नागदावासियों को एक समय अपर्याप्त जल सप्लाय का शंखनाद एक साजिश के तहत नागदा के नागरिकों को केमिकल युक्त पानी ग्रीष्मकाल में पिलाने की योजना क एक हिस्सा है। उद्योग प्रबंधकों ने ग्रीष्मकाल में कुछ समय जल अभाव में बन्द रहने वाले उत्पादन को अभी डबल प्रोडक्शन लेकर दुगने से अधिक चंबल नदी का जल उपयोग में लिया है, कारणवश चंबल के जलाशयों में जल स्तर कम हुआ है।
यह बात भाजपा अल्ससंख्यक मोर्चा के पूर्व प्रदेशमंत्री अब्दुल हमीद ने अपने जारी प्रेस बयान में कही है। श्री हमीद का कहना है कि पीएचई के अधिकारी ग्रेसिम प्रबंधकों से सांठ-गांठ कर उद्योगों के हित में गलत रिर्पोट प्रस्तुत कर रहे हैं। सन् १९५३ में मध्यभारत सरकार ने तथा १९५५, १९८९, १९९४, २००६ एवं २०११ में उद्योग प्रबंधकों व मध्यप्रदेश शासन क ेजल करार एवं बांध अनुमति शर्तो में पेयजल सप्लाय हेतु कहीं भी डेम से पानी लेने की मात्रा निर्धारित नहीं की है, बल्कि पेयजल प्राथमिकता के आधार पर नागदा-खाचरौद एवं रेल्वे को उपलब्ध कराने का दायित्व भी ग्रेसिम प्रबंधकों पर किया गया है, इतना ही नहीं वर्ष १९९४ के जल करार में तो स्पष्ट निर्देश हैं कि नदी में गर्मी के दिनों में होने वाले प्रदुषण को रोकने हेतु प्रदुषित जल को उपयोग में लेने के पूर्व पर्याप्त उपचार किया जाएगा तथा आवश्यक होने पर उद्योग द्वारा एक और उचार संयंत्र बनाने की योजना बनाई जावेगी। किन्तु शासन के आदेशों का कहीं पालन नहीं किया गया

नपा द्वारा जल सप्लाय के आंकडे पीएचई की पोल खोल रहे

श्री हमीद का कहना है कि पीएचई विभाग ने हाल ही में जो रिर्पोट प्रशासन को दी है वह गलत है, क्योंकि पीएचई अनुसार नपा चंबल नदी से प्रतिदिन एक करोड ७२ लाख लीटर पानी सप्लाय कर रही है जबकि वास्तविकता यह है कि नगर पालिका की पेयजल सप्लाय टंकियों की कुल क्षमता ही लगभग ५४ लाख लीटर है। वह भी चौबीस घण्टे इन्टेकवेल व फिल्टर प्लांट से पानी भरने पर प्रात: ७ बजे स ेजल सप्लाय व शाम ४ बजे तक आठ घंटों में लगभग १९ लाख लीटर पानी प्राप्त होता है। इस प्रकार कुल ७५ लाख लीटर पानी दोनों समय पेयजल में सप्लाय हो रहा है। जिससे स्पष्ट है कि पीएचई की रिर्पोट फर्जी होकर ग्रेसिम के इशारे पर बनी है। उनके अनुसार जलकरार में उद्योगों को बाउण्डेड किया है ना कि नगर पालिका को