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नागदा-पाश्चात्य संस्कृति धर्म और जीवन पर बोझ बन चुकी है- निमित्ताश्रीजी मसा

Nagda|Mpnews24|दूसरे के गुणों को पचाने की क्षमता जब तक लाएंगे नहीं हम धर्म नहीं कर सकते है। ग्रंथ के रचयिता न्याय सम्पन्न विभाग का प्रवेश करने का निर्देश देते हैं। एक समय में दो दृष्टियाँ रखना धर्म के विपरीत है । राम एवं रावण की दो दृष्टियाँ करके हमने धर्म को जटिल बना दिया। हम दूसरे के दु:ख को समझना नहीं चाहते। उचित व्यय कत्र्तव्य के पालन में होने में लग जाएगा तो कभी हमारे मन ग्लानि नहीं आएगी। अनंत भावों के कुसंस्कार और असंख्य भावो के सुख दु:ख जकड़े हुए है। हम निमित्त के आधार पर ही अपना मार्ग बना है। इसलिए उचित वेश होना चाहिए। किसी को दुख देना, दुखी बनाना पाप है और किसी को पापी बनाना वह महापाप है। पाश्चात्य संस्कृति आपके धर्म और जीवन पर बोझ बन चुकी है। यह बात सौम्यवदना श्रीजी की सुशिष्या निमित्ताश्रीजी ने अपने प्रवचन में आगम के 11 निर्देशो की व्याख्या करते हुए स्थानीय पाश्र्वप्रधान पाठशाला में प्रवचन करते हुए कही। उन्होने कहा कि हमारे अन्दर भावदया समाप्त हो गई है। गलत व्यवहार सामने वाले को भी डुबा देता है। पढ़ाई के साथ धार्मिक संस्कार नहीं दिए तो परिवार और धर्म दोनो प्रभावित होंगे। पत्नीयां अपने पति को श्रवण कुमार बनाने से सारे परिवार आदर्श बन जायेंगे। बाहरी सौन्दर्य, साज-सज्जा से आत्मा का कल्याण नहीं होता है। नारी को भगवान ने सजा धजा कर धरती पर भेजा है। उसकी मर्यादा रखने के लिये ही उचित वस्त्र धारण करना चाहिए ।

मीडिया प्रभारी विभोर चोपडा ने की अपील

प्रवक्ता विभोर चोपडा ने बताया कि साधवी निमित्ताश्रीजी मसा द्वारा आम आदमी के जीवन शैली को लेकर आध्यात्मिक जगत से जोडते हुए धर्म के ज्ञान की गंगा बहाई जा रही है। नागदा नगर की सर्व धर्म जनता से अनुरोध है कि प्रवचन का लाभ लेने के लिए अधीकतम संख्या में पहुचे।