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नागदा-लैंक्सेस उद्योग की धाधलियों का मामला विधायक जीतू पटवारी द्वारा विधान सभा में गुंजा

Nagda|Mpnews24|लैंक्सेस उद्योग के सात माह से लंबित पे-ग्रेडेशन का पांच सालाना समझौता नहीं होने तथा रसायनिक उद्योग में मापदण्ड से अधिक ठेका श्रमिकों से कार्य लिये जाने का मामला विधानसभा में ध्यानाकार्षण सूचना के माध्यम से कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने लगाया है।
मामले में जानकारी देते हुए प्रदेश कांग्रेस के महासचिव एवं पूर्व विधायक दिलीपसिंह गुर्जर ने बताया कि लैंक्सेस उद्योग में स्थाई श्रमिकों की संख्या बढाना, ठेकेदार श्रमिकों को स्थाई करने व पुराने पंचवर्षीय समझौते की मांगों पर कार्यवाही न होने व नये समझौते में हो रहे विलंब का मामला विधानसभा में ध्यानाकर्षण के माध्यम से उठाया गया है। विधायक पटवारी ने अपनी सूचना में कहा है कि नागदा स्थित लैंक्सेस उद्योग के प्रबंधकों द्वारा श्रम विभाग के अधिकारियों की सांठ-गांठ से श्रमिकों का वर्षो से लगातार शोषण कर केन्द्र व राज्य सरकार के श्रम अधिनियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।

उद्योग में मात्र २८ स्थाई श्रमिक

उद्योग में स्थाई श्रमिकों की संख्या अधिक होना चाहिये परंतु सिर्फ २८ स्थाई श्रमिक है तथा ३८० स्टॉफ कर्मी है और १९०० के लगभग ठेका श्रमिक है। उद्योग में लगभग ३०० से अधिक स्थाई नेचर के कार्य है जो नियमविरूद्ध ठेका श्रमिकों से कराये जा रहे है। विगत २०११-१२ में श्रम संगठनों एवं उद्योग के बीच पंचवर्षीय समझौता हुआ था जिन मांगों को अमल में लाने की सहमति प्रबंधन व ट्रेड युनियन के बीच बनी थी उनमें से अधिकांश मांगों को पुरा नहीं किया गया है विशेषकर स्थाई श्रमिकों की संख्या बढाने, ठेका श्रमिकों को स्थाई करने की मांग को प्रबंधन द्वारा पुरा नहीं किया गया है। आगामी नया समझौते में भी लगातार विलंब हो रहा है क्योंकि समझौता समाप्त हुये लगभग ७ माह बीत चुके है। अभी तो समझौता वार्ता भी प्रारंभ नहीं हो पायी है। लैंक्सेस उद्योग एक रासायनिक उद्योग है उसके मापदण्ड अनुसार ही श्रमिकों को पर्याप्त सुविधायें, वेतन आदि मिलना चाहिये जो नहीं मिल पा रहा है।

शासन के हेल्थ एण्ड सेफ्टी के अधिकारियों द्वारा

शासन के हेल्थ एण्ड सेफ्टी के अधिकारियों द्वारा भी शासन के दिए दिशा निर्देशों के अनुसार कार्य नहीं किया जाता है ना ही उद्योगों का लगातार निरीक्षण किया गया है जिसके कारण उद्योग में लगातार दुर्घटना हो रही है। दुर्घटना में कई बार जनहानि तक हो जाती है। ठेका श्रमिकों, स्थाई श्रमिकों व स्टॉफ कर्मियों द्वारा लगातार प्रबंधन द्वारा किए जा रहे शोषण के खिलाफ राज्य शासन से कई बार मांग की गई है शासन में बैठे वरिष्ठ श्रम अधिकारियों द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई है ना ही ठेका श्रमिकों को स्थाई नेचर के कार्य वाले कामों में स्थाई किया जा रहा है। वहीं उद्योग में हो रही दुर्घटना में भी हेल्थ एण्ड सेफ्टी अधिकारियों द्वारा उद्योग के अधिकारियों से सांठ-गांठ के कारण उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जाती है। श्रमिकों के हो रहे शोषण के खिलाफ शासन के द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किए जाने के कारण शासन के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है।

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