नागदा-आचार्यश्री स्नेह की सहज नदी – साध्वीश्री निर्मिताश्रीजी मसा

नागदा-आचार्यश्री स्नेह की सहज नदी – साध्वीश्री निर्मिताश्रीजी मसा

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Nagda|Mpnews24|मानव जीवन में आध्यात्मिक गुरू को मिलना कोई सहज कार्य नहीं है। प्रबल पुण्योदय होने के उपरांत गुरू की प्राप्ति होती है। प्रत्येक गुरू का एक मात्र लक्ष्य होता है शिष्य को सदमार्ग पर प्रशस्त कर स्वयं की आत्मा का कल्याण करना। लेकिन शिष्य यदि प्रमादवंश सदमार्ग को अंगीकार नहीं करता है तो उसके लिए गुरू नहीं वह स्वयं दोषी है। यह बात त्रिस्तुत्रिक सम्प्रदाय के गच्छाधिपति राष्ट्रसंत आचार्य देवेश श्रीमद्विजय जयंतसेन सूरीश्वरजी मसा के देवालोगमन निम्मित पंच दिवसीय महोत्सव के पांचवें दिन रविवार को सुबह ९.३० बजे लक्ष्मीबाई मार्ग स्थित पाठशाला भवन में आयोजित गुणानुवाद सभा को सम्बोधित करते हुए साध्वीश्री निर्मिताश्रीजी मसा ने कही। उन्होने आचार्यश्री के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आचार्यश्री का जीवन स्नेह की वह सहज नदी थी जिसमे खारा या मीठा पानी जो भी मिलता है स्वत: ही शुद्ध हो जाता था अर्थात कोई भी गुरू भक्त किसी भी प्रकार समस्या को लेकर आचार्यश्री के समक्ष प्र्रस्तुत होता समस्या के समाधान के साथ आत्मकल्याण में संल्गन हो जाता था। आचार्यश्री ने ६४ वर्ष के दीक्षा काल में भारत देश के २० राज्यों में दो लाख से अधिक किलोमीटर का विहार कर महावीर स्वामी के शाश्वत वाणी को जन-जन तक पहुचाने का जो कार्य किया है वह हम सब के लिए प्रेरणादायी है।
साध्वीश्री के सम्बोधन से पूर्व गुणानुवाद सभा की शुरूआत आचार्यश्री के चित्र पर मालार्पण, दीप प्रजलन एवं वासक्षेप पूजन से हुई। सामूहिक गुरूवंदन हेमंत कांकरिया ने करवाया। गुणानुवाद सभा को संघ अध्यक्ष सुनील वागरेचा, नवयुवक परिषद के राज्यकीय अध्यक्ष रमेश धारीवाल, कार्यकारणी सदस्य राजेश धाकड, राष्ट्रीय प्रचार मंत्री ब्रजेश बोहरा, महिला परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गुणबाला नाहर, महामंत्री पदमा सेठ, शोभा कोचर, रजंना लुणावत, अंजना कोठारी, मनोहरलाल कांठेड, आयुष बोहरा ने सम्बोधित किया। सभा का संचालन अभिषेक कोलन ने किया एवं आभार मनोज वागरेचा ने माना। प्रभावना का लाभ कांतिलाल मंयककुमार कोचर एंव शांतिनाथ जैन मंंदिर ट्रस्ट मंडल ने लिया।

महापूजन एवं महाआरती

दोपहर १.३० बजे पाठशाला भवन में साध्वीश्री की निश्रा में जयंतसेन सूरीश्वरजी मसा की गुरूपद महापूजन का आयोजन किया गया। करीब ४ घंटे चली महापूजन में स्थानीय मन मधुकर गु्रप के राजू सोनी एवं कैलाश गांधी ने भजनों के माध्यम से उपस्थित गुरू भक्तों का नृत्य करने के लिए मजबूर कर दिया। महापूजन का लाभ दाखाबाई शांतीलाल सकलेचा परिवार ने लिया। महापूजन पश्चात मूर्तिपूजक जैन श्रीसंघ के स्वामीवात्सलय का आयोजन पाठशाला भवन में किया गया। वहीं रात ८ बजे जैन कालोनी स्थित शांतीनाथ राजेन्द्रसूरी जैन मंदिर में सामूहिक नमस्कार महामंत्र का जाप एवं महाआरती का आयोजन किया गया इस दौरान मंदिर परिसर आचार्यश्री के जयकारों से गुन्ज उठा।

चातुर्मास में लगी रही है तप आराधना की झडी

चातुर्मास हेतु पाठशाला भवन चातुर्मास हेतु विराजित साध्वीश्री सोम्यावंदनाश्रीजी मसा की निश्रा में प्रतिदिन तप आराधना की झडी लग रही है। सांखली अ_म तप के साथ प्रतिदिन आयांबिल, एकासना, उपवास का क्रम जारी है। मीडिया प्रभारी विपिन वागरेचा ने बताया कि साध्वीश्री की निश्रा में कल (१७ जुलाई सोमवार) से शंखेश्वर पाश्र्वनाथ प्रभु की अ_म तप आराधना शुरू होगी। तीन दिवसीय आराधना का समापन २० जुलाई गुरूवार को पारणे के साथ होगा। वहीं २५ जुलाई मंगलवार से नव दिवसीय नमस्कार महामंत्र की आराधना का आयोजन होगा।