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नागदा-जिला प्रशासन जल सर्वक्षण अधिनियम के विपरित उद्योगों के हित में कृषि प्रयोजन पर ही प्रतिबंध लगा रहा है, नागदा के पेय जल में भी कटोती करने का षडयंत्र

Nagda |Mpnews24| ग्रीष्म काल में जल संकट उत्पन्न होने की आंशकाओं को ध्यान में रखते हुए गत दिनों कलेक्टर संकेत भोंडवे के द्वारा नागदा-खाचरौद विकासखंड को जल अभाव ग्रस्त मानते हुए जल परिरक्षण अधिनियम लागू किया था। कलेक्टर के द्वारा जारी आदेश के तहत चंबल नदी सहित सार्वजनिक जल स्त्रोतों को पेयजल के लिए सुरक्षित रखा गया है तथा आदेश के प्रभावी होने के साथ ही सार्वजनिक जल स्त्रोतों नदी के लिए पेयजल हेतु सुरक्षित रखा गया था तथा उक्त जल स्त्रोतो से सिंचाई एवं औद्योगिक प्रायोजन पर रोक लगा दी गई थी।इसी आदेश को अमल में लाने के उद्देश्य को लेकर शुक्रवार की शाम को एसडीएम रिजु बाफना के निर्देश में तहसीलदार रमेश सिसौदिया, नगर पालिका का अमला एवं पुलिस बल के साथ मेहतवास क्षेत्र स्थित नदी किनारों का भ्रमण किया गया तथा यहां प्रतिबंध के बावजूद नदी से मोटरों के माध्यम से सिंचाई हेतु पानी लेने वाले तीन किसानों के मोटरों को जब्त कर पंचनामा कार्यवाही को अंजाम दिया गया। जिन किसानों की मोटर पम्प जब्त किए गए उनमें रतनपिता हतेसिंह, जीवनसिंह पिता रामचन्द्र ,नारायणसिंह पिता माधोसिंह शामिल हैं।

जिस रास्ते से नायन जाना था वह छोड़ा क्यो?

किसानों की मोटरे जब्त करने के लिए प्रशासनिक अमले की कार्यवाही पर इस बात को लेकर भी सवाल उठने लगे कारण शुक्रवार को प्रशासन के द्वारा गांव नायन क्षेत्र में नदी एवं सार्वजनिक स्थलों के जल स्त्रोतों को सुरक्षित रखने तथा यहां से सिंचाई के कार्य पर रोक लगाने के लिए प्रशासन एसडीएम रिजु बाफना के नेतृत्व में हरकत में आया था लेकिन प्रशासन ने नायन डेम के निकट से गांव नायन में जाना मुनासिब नहीं समझा तथा मेहतवास के रास्ते से जाकर कार्यवाही को अंजाम दिया जबकि नायन डेम के निकट ही कतिपय प्रभावशाली लोगों के द्वारा चंबल के पानी को मोटर पम्पों से खींचकर रेत की धुलाई का कार्य किया जा रहा था । सूत्रों का तो यह भी कहना है कि उक्त स्थान से प्रतिदिन बड़ी संख्या में चंबल के पानी को खिचकर टैंकर भरने के कार्य को भी अंजाम दिया जाता है। अगर प्रशासन ईमानदारी से अपनी कार्यवाही को अंजाम देने के लिए सक्रिय हुआ है तो फिर उक्त स्थान को किसलिए छोड दिया गया।

अनुपयोगी पानी वाले क्षेत्र में भी थमाया नोटिस

डाउन स्ट्रीम क्षेत्र में चंबल नदी के किनारे बसे गांव अटलावदा, गीदगढ़, परमारखेड़ी आदि गांवों को जल परिरक्षण अधिनियम के तहत एसडीएम के द्वारा यहां के सरपंचों व सचिवों को नोटिस जारी किए गए है। जबकि डाउन स्ट्रीम क्षेत्र में जो गांव आ रहे है और इन गांवो को एसडीएम के द्वारा नोटिस थमाए गए है यहां से गुजरने वाली चंबल नदी का पानी दूषित माना जाता है तथा गांव के लोग उक्त पानी का उपयोग पीने में भी नहीं लेते है तथा मवेशी भी इस पानी को नहीं पीते है। उसके बावजूद एसडीएम के द्वारा बिना किसी तहकीकात के नोटिस थमाए गए है उसको लेकर उक्त गांव के लोगो में तरह तरह की चर्चाए हो रही है। यहां डाउन स्ट्रीमों के किसानों का यह भी कहना है कि बिरलाग्राम हनुमान डेम से लेकर नायन ,पिपलोदा अमलावदियाबीका डेम आते है तथा इसी क्षेत्र में कई तलाब भी है उक्त स्थानों से पानी की चोरी खुलेआम होती है तथा टेंकर भरे जाते है और वहीं टेंकर उद्योग में सप्लाए भी होते है लेकिन प्रशासन यहां सख्त रूप से कार्यवाही को अंजाम नहीं देता है और जिस डाउन स्ट्रीम क्षेत्र का पानी पीने के उपयोग में नहीं आता है उन्हे नोटिस दिए जा रहे है।

 ३३०एमसीएफटी पानी शेष ,प्रशासन के लिए चुनौती

इधर चंबल नदी व क्षेत्र के अन्य जल स्त्रोतों में जमा पानी का आकंलन किया जाए तो वर्तमान में लगभग ३३० एमसीएफटी पानी उपलब्ध है। जिससे चंबल के बांधों में २०० एमसीएफटी व जलवाल तालाब में ७५ एमसीएफटी तथा टकरावदा तालाब में ५५ एमसीएफटी पानी जमा है। प्रतिदिन की खपत ०४ एमसीएफटी आंकी गई है, जिससे ०२ एसीएफटी पानी ग्रेसिम उद्योग अपनी उत्पादन प्रकिया के संचालन के लिए लेता है, इसके अलावा लगभग ०१ एमसीएफटी पानी नागदा, खाचरौद व रेलवे की पेयजल आपूर्ती में खर्च हो रहा है। शेष ०१ एफसीएफटी पानी वाष्पीकरण, सिंचाई व अन्य प्रयोजन में दोहन किया जा रहा है। ऐसे में ०४ एमसीएफटी पानी प्रतिदिन खपत के हिसाब से अगामी मानसून कि तिथी ३० जून तक लगभग ४८० एमसीएफटी पानी की जरुरत पड़ेगी। वर्तमान में लगभग ३३० एमसीएफटी पानी ही चंबल नदी व अन्य जल स्त्रोतों में शेष है। इस परिस्थिती में लगभग १५० एससीएफटी पानी की आवश्यकता को पूूरा करना प्रशासन के समक्ष एक चुनौती बनता दिख रहा है।

इनका कहना

कलेक्टर के आदेश के तहत जल परिरक्षण अधिनियम लागू किया गया हैं। एसे में प्रशासन के द्वारा नदी एवं सार्वजनिक स्थलों के जल स्त्रोतों को सुरक्षित रखने के लिए शुक्रवार से अभियान की शुरूआत की गई है। यह अभियान निरंतर रूप से चलाया जाएगा। कारण प्रशासन ने संंबंधित अधिनियम का पालन करने हेतु शहर एवं नदी किनारे आने वाले गांवों में मुआदी कराई थी। बावजूद कतिपय किसानों के द्वारा चंबल नदी से मोटर पम्प के माध्यम से पानी लेकर सिंचाई के कार्य को अंजाम दिया जा रहा था जिसकी जानकारी मिलने पर मेहतवास क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चंबल नदी के किनारों पर जाकर मौका स्थिति को देखा गया तथा यहां से तीन किसानों की मोटर जब्त कर पंचनामा कार्यवाही को अंजाम दिया गया है।
                                                                                            श्री रमेश सिसौदिया
                                                                                           अपर तहसीलदार नागदा

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