नागदा – सनोलिया की बड़ी जीत, अब प्रीती उपभोक्ता सहकारी भण्डार की शासकिय उचित मुल्य की दुकान निलंबित तथा 5000- रूपये की प्रतिभूति होगी राजसात

0
172

Nagda|Mpnews24|राज्य सूचना आयोग के ताजे फैसले से तत्कालीन कलेक्टर एम गीता एवं तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी संतोष टेगौर द्वारा जो आदेश दिये गये थे केन्द्रीय मंत्री एवं उनके सहयाोगीयों के दबाव में तत्कालीन कलेक्टर बीएम शर्मा द्वारा पलट दिया गया था लेकिन राज्य सूचना आयोग द्वारा इसे निरस्त कर दिये जाने से आदेश पुनह प्रभाव में आ गया है इस पर अनुविभागीय अधिकारी नागदा को तत्काल प्रभाव से पालन करवाना हैं

यह था विवादापद आदेश

प्रीती उपभोक्ता सहकारी भण्डार द्वारा तत्कालीन कलेक्टर एम गीता के 27 अप्रेल 2012 के पारित आदेश एवं अनुविभागीय अधिकारी टेगौर द्वारा दिये गये आदेशो का पालन नही कर म.प्र सार्वलनिक वितरण प्राणाली (नियंत्रण) आदेश की कण्डिका 13 का स्पष्ट उल्लघन किया गया था जो आवश्यक वस्तू अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के अन्र्तगत दण्डनीय अपराध था इसलिये म.प्र. सार्वजनिक वितरण प्राणाली (नियंत्रण) आदेश की कण्डिका 11(2) प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आपके द्वारा जमा प्रतिभूति की राशि रू. 5000/- शासन हित में राजसात की जाकर आपके द्वारा संचालित शासकिय उचित मूल्य की दुकान तत्काल प्रभाव से अस्थाई रूप से निलंबित की जाती है। निलंबित दुकान राजेन्द्र सूरी प्रा.स.उ. भण्डार वार्ड क्र. 10,19,20 पर अटैच की जाती है।

आरटीआई लड़ाई एक नजर में

अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय राजस्व में तत्कालीन लोकसूचना अधिकारी टैगोर के कार्यकाल में कैलाश सनोलिया ने वर्ष २०१२ में आरटीआई दायर की थी। प्रीति प्राथमिक सहकारी उपभोक्ता भंडार से सरकार द्धारा आवंटित राशन, राशन कार्ड पर वितरीत खाद्य सामग्री का ९ वर्षों का ब्यौरा मांगा था। लोकसूचना अधिकारी ने जानकारी इस दलील के साथ उपलब्ध नहीं कराई कि भंडार सूचना के अधिकार दायरे में नहीं आते हैं। प्रथम अपील में तत्कालील कलेक्टर डॉ एम गीता ने जानकारी मुहैया कराने का आदेश दिया। आदेश में यह खुलासा किया कि सूचना अधिकार में भंडार संचालक जानकारी मुहैया कराने के लिए बाध्य है। उसके बावजूद कलेक्टर के आदेश का उल्लघंन हुआ और जानकारी नहीं दी गई। लगभग ११ माह के बाद तत्कालीन एसडीएम ने प्रीति प्राथमिक सहकारी उपभोक्ता भंडार को निलबित कर प्रतिभूति राशि जप्त करने का आदेश दिया। भंडार संचालक की अपील पर बतौर कलेक्टर न्यायालय बीएम शर्मा ने वर्ष २०१४ में भंडार को बहाल कर एसडीएम का आदेश निरस्त कर दिया। इधर, राय सूचना आयोग में जानकारी उपलब्ध नहीं कराने पर पूर्व से २०१२ में अपील दायर हो चुकी थी। जिसका निर्णय सामने आया।

२८ जून को अफ सरों को किया तलब

आयोग अदालत ने संतोष टैगोर तथा नागदा के अनुविभागीय राजस्व अर्थात लोकसूचना अधिकारी को शौकाज नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। साथ ही २८ जून को भोपाल तलब किया है। स्पष्टीकरण २३ जून तक तक मांगा है। प्रीति उपभोक्ता भंडार अध्यक्ष को भी उक्त तिथि को तलब किया है। लोकसूचना अधिकारी अर्थात एसडीएम नागदा को आदेश दिया कि मांगी गई जानकारियां उपलब्ध कराए तथा इस बात का प्रमाणित पालन प्रतिवेदन आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें।

कलेक्टर के माध्यम से तामिली निर्देश

आयोग न्यायालय ने कलेक्टर उौन को अधिकारी संतोष टैगोर, उपायुक्त नगरनिगम इंदौर तथा राजस्व कार्यालय नागदा के लोकसूचना अधिकारी को जारी शौकाज नोटिस तामिल कराने का निर्देश निर्णय में दिया है। प्रीति उपभोक्तता भंडार नागदा के अध्यक्ष को भी सूचना देने का निर्देश है। तामिली सूचना प्रतिवेदन से भी आयोग को अवगत कराने का कलेक्टर के नाम निर्देश है।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY