नागदा -प्रीती सहकारी उपभोक्ता भण्डार के प्रकरण में संभागायुक्त बी.एम. शर्मा पर पत्रकार कैलाश सनोलिया की अपिल पर चला राज्य सूचना आयोेग का डन्डा धारा 20 बी में दण्डित करने की अनुसंशा

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Nagda|Mpnews24|म.प्र. राज्य सूचना आयोग द्वसास अपिल क्र. ए-3047/एसइाईसी-1/रासूआ/नागदा/2016 में दिनांक 15 मई 2017 को पत्रकार कैलाश सनोलिया द्वारा की गई अपिल में वर्तमान संभागायुक्त एवं तथा उज्जैन जिला के पुर्व जिलाधीश बी.एम.शर्मा के विरूद्ध सूचना के अधिकार अधिनियम धारा 20 (2)अन्र्तगत दण्डित करने की अनुशंसा की है। यह आदेश प्रीती सहकारी उपभोक्ता भण्डार के विरूद्ध जारी किया गया है। यह भण्डार वर्तमान केन्द्रीय मत्री के निकटस्थ भाजपा नेता एवं पत्रकार के द्वारा पर्दे के पीछे से संचालित किया जाता है।

क्या है मामला

तत्कालीन अपीलय अधिकारी /कलेक्टर एम.गीता द्वारा पारित आदेश दिनांक 27 अप्रेल 2012 की पालनार्थ तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी द्वारा वांछित जानकारी को उप्लब्ध संस्थ्ज्ञा के विरूद्ध पारित आदेश 8 अप्रेल 2013 को पारित किये गये आदेश को निरस्त कर पश्चातवर्ती अपीलीय अधिकारी/ कलेक्टर बी एम शर्मा द्वारा विधि से असंगत होकर कार्यवाही की गई है। आयोग द्वारा पारित 11 फरवरी 2009 को पारित आदेश तथा पुर्ववर्ती अधिकारी एम.गीता द्वारा 27 अप्रेल 2012 को पारित आदेश प्श्चातवर्ती अपीली अधिकारी बीएम शर्मा के संज्ञान में थे इसके बावजूद भी 27.07.2014 को आदेश पारित किया और लोक सूचना अधिकारी की यह दलिल अमान्य की गई थी कि अनुदान के रूप् में कोई वित्तिय सहायता प्राप्त ना होने के कारण प्रीती प्राथमिक सहकारी उपभोक्ता भण्डार जानकारी देने के बाध्य नही है पश्चातवर्ती अपीली अधिकारी द्वारा 11 फरवरी 2009 को पूरी तरह दृष्टीओझल किया तथा एम.गीता के आदेश को पूर्णतया पलट दिया जबकि सूचना का अधिकारी अधिनियम के अन्र्तगत तत्कालीन कलेक्टर बीएम शर्मा को ऐसा करने का कोई अधिकार नही था।

अधिनियम के अनुसार यह माना

सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 19 के अन्र्तगत यह अधिकारिता केवल राज्य सूचना आयोग को प्राप्त है जिसका की बीएम शर्मा के द्वारा अनाधिकृत रूप से अतिक्रमण किया गया। बीएम शर्मा द्वारा अपीली अधिकारी के रूप् में अपने अधिकार क्षेत्र से परे जाकर 22 जूलाई 2014 का आदेश विधि एवं न्याययिक प्रक्रिया के विरूद्ध होने से निरस्त किये जाने योग्य है।

दण्डित किये जाने की अनुशंसा

आयोग ने माना है कि अपीली अधिकारी बीएम शर्मा ने विधि विरूद्ध कृत्य कर अपने पद का दुरूपयोग किया है और अनाणिकार चेष्ठा करते हुए सूचना का अधिकार अधिनियम का भी उल्लघन किया है जो कि गंभीर दुराचरण की श्रेणी में आता है अतः बीएम शर्मा के विरूद्ध धारा 20 (2) के अन्र्तगत दण्डि किया जाना उचित होगा।

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