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नागदा-डोर टू डोर मतदाता सूचियों के सत्यापन में भी लापरवाही बरते रहे अधिकारी ,प्रतिदिन जारी हो सत्यापन का आंकडा

Nagda|Mpnews24| निर्वाचन आयोग के निर्देशों पर विधानसभा निर्वाचन २०१८ को मद्देनजर रखते हुए मतदाता सूचियों का पुर्नरीक्षण किये जाने का कार्य स्थानिय राजस्व विभाग के अधिकारियों की देखरेख में चल रहा है। लेकिन मतदाता सूचियों के पुर्नरीक्षण में पूर्ण रूप से न तो पारदर्शीता रखी जा रही है और ना ही घर-घर चलो अभियान के अंतर्गत वास्तविक मतदाताओं का डोर टू डोर सत्यापन किया जा रहा है। ऐसे में फर्जी मतदाताओं की संख्या बढने तथा वास्तविक मतदाताओं के नाम नहीं जोडे जाने की आशंका बढ गयी हैै। इतना ही नहीं नागरिकों का तो यहाँ तक कहना है कि बीएलओ घर पर बैठ कर ही नेताओं के ईशारे पर नाम बढाने एवं घटाने का कार्य कर रहे हैं। ऐसे में निष्पक्ष निर्वाचन हो पाने की अशंकाओं पर पानी फिरता नजर आ रहा है।

क्या है मामला

२०१८ में होने वाले विधानसभा चुनाव को मध्येनजर रखते हुए मतदाता सूची बनाने के कार्य को अंजाम देने की प्रकिया बीएलओं के माध्यम से प्रारंभ हुई है। ३० नवम्बर तक मतदाता सूची के कार्य को पूर्ण करने की जिम्मेदारी भी बीएलओं को निर्वाचन विभाग के माध्यम से मिली है तथा सभी बीएलओं को मतदाताओं के निवास स्थान पर जाकर जिन मतदाताओं की उम्र १८ वर्ष हो गई है उनके नाम मतदाता सूची में जोडने हैं जो सूची से सम्मिलित होने से वंचित रह गए है। साथ ही ऐसे मतदाताओं के नाम को हटाना भी है जिनकी मृत्यु हो गई है या फिर व शहर छोड चुके है्र इस कार्य को स्मार्ट फोन के माध्यम से पूर्ण करने को कहा गया है। लेकिन जिस तरह की बाते चर्चा के माध्यम से सामने आ रही है वह तो यहीं दर्शा रही है कि मतदाता सूची के कार्य को अंजाम देने की प्रकिया में बडा गडबडझाला किया जा रहा है। मतदाताओं के घर पर तो अभी तक तो किसी बीएलओं ने दस्तक तक नहीं दी है अपितु नेताओं के घर पर बैठकर मतदाता सूची को तैयार करने का खेल किया जा रहा है। अगर इस तरह जो चर्चाए हो रही हे वह वास्तविक व सत्यता के निकट है कि यही माना जा सकता है कि मतदाता सूची में गडबड करने का खेल खेला जा रहा है। अगर ऐसा नहीं है तो बीएलओं को मतदाताओं के निवास स्थान पर जाकर दस्तक देकर मतदाता सूची तैयार करना चाहिए। ताकि उन पर मतदाता सूची में गडबड झाला करने व नेताओं के निवास पर जाने चर्चाओं के माध्यम से लगाए जा रहे है वह निराधार साबित हो। खेर कुछ भी हो मतदाता सूची के कार्य पर शंका कुशंका तो इस बात को लेकर भी हो रही है इस कार्य को अंजाम देने में काफी देरी की गई।

मृत्यु एवं जन्मदर के आंकडों का सत्यापन नहीं

मतदाता सूचीयों के पुर्नरीक्षण में निर्वाचन कार्यालय के अधिकारियों द्वारा नगर पालिका एवं चिकित्सालयों से मृत्यु के आंकडें प्राप्त कर मतदाता सूचियों का सत्यापन करते हैं तो कई चौकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। बताया जाता है कि अकेले वर्तमान वार्ड क्र. १७ एवं १८ में सैकडों की संख्या में ऐसे मतदाता हैं जो या तो दिवंगत हो चुके हैं अथवा यहाँ पलायन कर चुके हैंं। बावजुद इसके यहाँ बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर मतदाता सूचियों का सत्यापन नहीं किया जाना कई प्रकार की शंका-कुशंका को जन्म दे रहा है। वर्ष २०१७ में बालिग होने वाले मतदाताओं के आंकडों का भी निर्वाचन कार्यालय के पास कोई अता-पता नहीं है। जबकि होना यह चाहिए कि किन वार्डो में कितने निवास स्थलों का सत्यापन अधिकारियों द्वारा किया गया इसका प्रतिदिन का आंकडा निर्वाचन विभाग द्वारा मिडिया को जारी किया जाना चाहिए। जिससे की पारदर्शीता दिखाई देगी।

नेताओं के प्रभाव में अधिकारी

वर्तमान में निर्वाचन कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी नेताओं के प्रभाव में ज्यादा दिखाई दे रहे हैंं। एक अधिकारी ने तो अपना नाम नहीं छापने की शर्त पर यहाँ तक कह दिया कि जिन मतदाता सूचियों का सत्यापन चुनाव कार्यालय में होना चाहिए वह मतदाता सूचियाँ नेताओं के घर पर उनके कार्यकर्ताओं द्वारा खंगाली जा रही हैं। ऐसे में अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी एक बडा सवाल अंकित हो गया है ?