नागदा-एक बड़े मजदुर नेता ने, पानी के मामले में ट्रेड युनियन के...

नागदा-एक बड़े मजदुर नेता ने, पानी के मामले में ट्रेड युनियन के नेताओं को आडे़ हाथों लिया

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Nagda | Mpnews24 | वरिष्ठ श्रमिक नेता कैलाश रघुवंशी ने संयुक्त टे्रड यूनियन मोर्चे के नेताओं पर इस बात का आरोप अपने जारी प्रेस बयान के माध्यम से लगाया है कि शहर के नागरिकों का पानी बंद करने का ठेका संयुक्त मोर्चे ने ले लिया है ? तथा वह उद्योग प्र्रबंधन के पक्षधर बनकर जनता को प्यासा मारना चाहते है क्योंकि नगर पालिका के द्वारा शहर की जनता को दोनों समय चंबल से पानी सप्लाए किया जा रहा है एसे में श्रमिक नेता एक समय का पानी बंद कराने को लेकर सक्रिय हुए है। श्री रघुवंशी का यह भी कहना है कि 18 वर्ष ने नगर पालिका का सुचारू संचालन करने वाले पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष बालेश्वर दयाल जायसवाल के समय में दोनो समय पानी का सप्लाए किया जाता है उस समय भी पानी की कमी के बावजूद उद्योग चलता था तथा जनता को भी दोनों समय पीने का पानी मिलता था। लेकिन बाद में तत्कालिन भाजपा की नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमति विमला चौहान के कार्यकाल में दो समय मिलने वाले पानी में कटौती कर दी गई थी तब से एक समय ही नगर की जनता को कम दबाव के साथ पीने का पानी सप्लाए किया जाता था लेकिन वर्तमान में शहर की जनता को दो समय पीने का पानी मिल रहा है यह बात उद्योग प्रबंधन एवं संयुक्त टे्रड यूनियन मोर्चे के नेताओं को रास नहीं आ रही है और वह मिलने वाले पानी को बंद कराने में लगे हुए है।

मेनेजमेंट पर लगाया पानी बेचने वालों की मदद का आरोप

श्री रघुवंशी का कहना है कि यहां के उद्योग प्रबंधन को पानी की चिंता होती है तो उनके अपने ही कतिपय शुभ चिंतक जिन्हे ठेके दे रखे है नदी में पाईप डालकर पूरे समय पानी के टैंक्कर भरकर उद्योग को ही पानी बेच रहे है। लेकिन इस पर रोक लगाने की कोई पहल नहीं की जा रही है अपितु एसे लोगों की प्रबंधन मदद ही कर रहा है। श्री रघुवंशी का तो यह भी आरोप है कि जो लोग चंबल से पानी के टैंकर बेचते है एसे लोगों के द्वारा नदी में मलबा ड़ालकर एक किलोमीटर तक नदी को बुर दिया गया है और यहीं से टैंकरों के आने जाने का रास्ता बना लिया है।

यह है समझोता

चंबल नदी पर बनाए गए बांध को लेकर शासन एवं उद्योग प्रबंधन के बीच जो समझौता सम्पन्न हुआ है उसमें इस बात का स्पष्ट उल्लेख हुआ है कि उद्योग नागदा ,खाचरौद एवं रेल्वे को पेयजल हेतु पानी देने के लिए बाध्य है। परंतु उद्योग एवं उससे जुड़े कतिपय लोग हर वर्ष शहर के नागरिकों को पीने के पानी से वंचित रखकर पंूजीपतियों की जेब भरने का काम कर रहे है। यहां उन्होने ठेका श्रमिकों के शोषण को लेकर भी आरोप लगाया है।